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शनिवार, 8 जून 2013

तो बात कुछ और ही होती ...

जिंदगी हसीन है  तेरे बिन भी  यूँ तो
तू होती इसमें शामिल तो बात कुछ और ही होती ...


जागता हूँ मै ,सोता हूँ मैं
हँसता हूँ मैं ,रोता हूँ मैं
हाथ थामे ज़िन्दगी का  चलता हूँ मैं
साथ ग़र कुछ कदम तुम भी चलती तो बात कुछ और ही होती ...


टूटता हूँ मैं,संभालता हूँ मैं
गिरता हूँ मैं,उठता हूँ मैं
वक़्त के साथ कभी कुछ बदलता हूँ मैं
बदलती तुम भी साथ मेरे तो बात कुछ और ही होती ...

बढ़ता हूँ मैं ,थमता हूँ मैं
दौड़ता हूँ कभी ,कभी रुकता हूँ मैं
खोता हूँ कभी खुद को तेरी यादों के आगोश मे
खोती  कभी तू  खुद को मेरे लिए तो बात कुछ और ही होती ...


यूँ तो मंजिल  तेरे बगैर भी जाएगी मुझे
साथ गर राह पर तेरा मिल जाता तो बात कुछ और ही होती ...


                      "   तू जो कहें  कविता एक लिखने को ,मैं किताब लिख दूँ 
                           तू पूछे जो हसरत मेरी ,मैं अपने जज्बात लिख दूँ  "


रविवार, 21 अक्टूबर 2012

जानता नहीं

है ये कैसा सफ़र ...कि जानता नही कि  चल रहा हूँ या गुजर रहा हूँ
है ये कैसी अजब सी लगन ...कि जानता नहीं कि जल रहा  हूँ  या बुझ रहा  हूँ

साथ चलने के  लिए ज़माने के साथ
छूटें हैं पीछे कई मेरे हाथ
भीड़  हैं जहाँ की मेरे चारों ओर
ढूँढता हूँ कोई जाना -पहचाना सा
चेहरा इसमें यूँही ...
है ये कैसी उलझन ...कि जानता नहीं कि पा रहा हूँ या खुद को खो रहा हूँ

दौड़ में जिंदगी की  बड़ी दूर निकल आया हूँ
कुछ था सचमुच मेरा अपना कही खो आया हूँ
पाया भी है कुछ मैंने पर
इसमें कुछ कमी सी है ...
है ये कैसी खलिश ...कि जानता नहीं कि हँस रहा हूँ या रो रहा हूँ ...

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

कहा था तुमने

भुला न पाओगे मेरी यादों को, कहा था तुमने
वास्ता अपनी चाहत का दिया था तुमने
ना समझ सका तुम्हारे उन एहसासों को
जिनके हर अंश पर मेरा नाम लिखा था तुमने

खोकर तुम्हे ये एहसास हुआ
जैसे खुद को ही कहीं खो बैठा हूँ मैं 
ख़ामोशी जब कभी घेरेगी तुम्हे
दिल में कसक आँखों में मेरा चेहरा होगा, कहा था तुमने

दूर तुम क्या गयी मुझसे जैसे संसार मेरा कहीं खो गया
जो था मेरा मानो वो किसी और का हो गया
बहुत पछताओगे मुह मोड़ के जाते हो अभी
कुछ कहना कभी चाहोगें तो कह ना पाओगे, कहा था तुमने

हुआ था बावरा दुनिया की चकाचोंध में
अब समझा प्यार बिन कहाँ कुछ रखा है दुनिया में
जिसके लिए छोड़ के जाते हो ,एक दिन जब वो ही ठुकराएगा
तो ख्याल सिर्फ मेरा आयेगा, कहा था तुमने

अब पल-पल तड़पता हूँ दिल पे बोझ लिए
अफ़सोस भी करता हूँ अपने किये  पे
एक बार जो चली गयी मुड़ के
वापस ना आऊँगी, कहा था तुमने

कहाँ जाऊ,क्या करूँ, कुछ समझ नहीं आता है 
हर पल तुम्हारा मुस्कुराता चेहरा सामने आता है
जब कभी  मुश्किल  आए, आँखें बंद करके
 मेरा नाम पुकारना ,पास मुझे पाओगे ,कहा था तुमने